Tuesday, November 29, 2011

सन्देश

राष्ट्र को हमें बचाना है, प्यार का सबक सिखाना है |
कपटी-कुटिल-रक्त-लोलुप को राह दिखाना है ||
राष्ट्र को .... |

फैला ये आतंक विश्व में, करता तांडव-नृत्य है |
अमन-चैन का दुश्मन यह, एक खतरनाक कुकृत्य है |
मुह बाये आतंकवाद को, मार भगाना है ||
राष्ट्र को .... |

दुश्मन के नापाक इरादे, कामयाब नहीं होंगे अब |
लाल देश की माटी खातिर, दाग़दार नहीं होंगे अब
खोया जो सम्मान था पहले-उसको पाना है ||
राष्ट्र को .... |

क्या छोटा-क्या बड़ा यहाँ पे, सब तो भाई-भाई हैं |
मानवता बस एक धर्म है, जानो येही सच्चाई है |
जाति-पांति व वर्ग-भेद को, जड़ से मिटाना है ||
राष्ट्र को .... |

गाँव-गाँव में, नगर-नगर में, बस्ती-कुनबा डगर-डगर में |
नदी-तालाब की लहर-लहर में, सागर की हर भंवर-भंवर में |
प्रेम-भाव अरु श्रद्धा का-परचम फहराना है ||
राष्ट्र को .... |

जीवन धन्य वही जो, न्योछावर निज माटी पे |
जल-थल-अम्बर अपने वतन की, सबसे प्यारी थाती पे |
वतन-परस्ती की मस्ती को- फिर से लाना है ||
राष्ट्र को हमें बचाना है |

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