Sunday, June 10, 2012

बेफिक्र ज़िन्दगी...


बेफिक्र ज़िन्दगी को बिताना है अति भला ।
गर रोड़े आयें राह में तो करना ना गिला ।।
जब आये ग़म का दौर तो ना धर्य छोड़ना,
खोना नहीं विवेक जंग से मुंह न मोड़ना ।
जीवन का है ये फलसफ़ा,समझ लो दोस्तों -
जिसने जीया है इस तरह,उसी को सब मिला ।।
                                         गर रोड़े....।।
पर्वत-शिखर पे झूम के बादल हैं बरसते,
नदियों के जल-प्रवाह तो थामे नहीं थमते।
जिन शोख़ियों से शाख पे निकलती हैं कोपले -
थमने न पाये ऐसा कभी शोख़ सिल-सिला ।।
                                        गर रोड़े ....।।
कुदरत का ही कमाल है ये सारी कायनात,
होता कहीं पे दिन है तो रहती कहीं पे रात ।
गुम होते नहीं तारे चमका करे ये सूरज -
महके है सगरो वादी ये फूल जो खिला ।।
                                       गर रोड़े ....।।
जब नाचता मयूर है सावन में झूम के ,
कहते हैं,होती वर्षा तब झूम -झूम के ।
जो श्रम किया है तुमने वो फल अवश्य देगा -
मेहनतकशों के श्रम का मीठा है हर सिला ।।
                                      गर रोड़े ....।।

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