Saturday, December 1, 2018

मायूस ज़िन्दगी का...


मायूस ज़िन्दगी का इतिहास लिख रहा हूँ,
लूटा है मिल के सबने अहसास लिख रहा हूँ।।
             मिलते तो हैं गले वो इक यार की तरह,
             काटेंगे वो गला भी कुछ ख़ास लिख रहा हूँ।।
                                   मायूस ज़िन्दगी का....
इक दर्द है यहाँ तो इक दर्द है वहाँ भी,
बस दर्द ही है जीवन,बिन्दास लिख रहा हूँ।।
                           मायूस ज़िन्दगी का....
            कोई रहे ना भूखा, नंगा रहे ना  कोई,
           यह आस ले के मन में विश्वास लिख रहा हूँ।।
                               मायूस ज़िन्दगी का....
बुझती कभी नहीं क्यूँ हैवानियत की प्यास?
इन्सानियत भी प्यासी वो प्यास लिख रहा हूँ।।
                            मायूस ज़िन्दगी का इतिहास....

कर भरोसा यहां...


कर भरोसा यहां आदमी का नहीं,
आदमी है यहाँ आदमी का नहीं।।
       रोज मिलते हैं वो मुस्कुराते हए,
       पर तबस्सुम का फ़न आदमी का नहीं।।
                              कर भरोसा यहां....
दिल यक़ीनन उन्होंने हमें दे दिया,
दिल तो है वो मगर आदमी का नहीं।।
                       कर भरोसा यहां....
      वो तो लगते हमें हैं कि हैं आदमी,
      सिर्फ़ ईमान-धरम आदमी का नहीं।।
                        कर भरोसा यहां....
सबसे अच्छा ख़ुदा का हुनर आदमी,
उफ, बेहतर हुनर आदमी  का  नहीं।।
                     कर भरोसा यहां आदमी का नहीं।।

जीवन-बगिया...


जीवन-बगिया महकेगी कैसे जो तू संग नहीं,
फूलों का बिस्तर चुभे जैसे नश्तर कोई उमंग नहीं।।
                                               जीवन-बगिया....
सावन भी आया,छायीं घटायें,
चंचल बहे पुरुवाई।
फिर भी नहीं मेरे मन को चैन है,
ऋतु भी बहारों की आयी।
     रङ्गों में कोई रङ्ग नहीं।।
                       जीवन-बगिया....
कोयल के मीठे बोल न भाये,
न भाये पपीहा की बानी।
चन्दन का लेपन जलन है अगन की,
बूढ़ी भयी अब जवानी।
    वसूलों का कोई ढंग नहीं।।
                  जीवन-बगिया....
बादल व बरखा,पंछी व पर्वत,
सागर व सरिता,सुर-सरगम सब।
फीके पड़ गये सारे नज़ारे,
भाये न,बरसे अमृत भी अब।
     अब तो उड़े मन-विहंग नहीं।।
                 जीवन-बगिया....
भौरे हैं मायूस,कलियाँ उदासी,
साजन की गलियाँ हैं सूनी।
अम्बर पे सब हैं,सितारे व सूरज,
फीकी मगर रौशनी।
     सागर में कोई तरंग नहीं।।
               जीवन-बगिया महकेगी....

तुझे हो मुबारक़...


तुझे हो मुबारक़ तेरा प्यारा दिलवर,
मेरे दिल को कोई शिकायत नहीं है।
चली जा कली बन के तू उस चमन की,
मेरे दिल-चमन को शिकायत नहीं है।।
                    तुझे हो मुबारक़....
दुनिया तो बगिया है ज़िन्दगी की,
शम्मा है मोहब्बत की रौशनी की।
चली जा कली बन के तू उस चमन की,
मेरे दिल को कोई शिकायत नहीं है।।
                   तुझे हो मुबारक....
मेरा क्या ठिकाना,मैं एक दीवाना,
कभी हूँ हक़ीकत, कभी हूँ फ़साना।
पतंगा जला है शम्मा की लपट से,
दुनिया-ए-मोहब्बत की रवायत यही है।। 
                तुझे हो मुबारक....
समझना हमें एक झोका पवन का,
कि उड़ता हुआ एक पंछी गगन का।
सलामत रहे यार तेरा जहां में,
ख़ुदा को भी मेरी हिदायत यही है।।
               तुझे हो मुबारक....

प्रगति-पथ पर...






प्रगति -पथ पर पथिक है दूर अब मंज़िल कहाँ?
मंज़िलें पावों तले हैं,गर रहें अरमां जवां ।।
         आदमी तो हौसला का,
         साज़  है,आवाज़  है।
          हौसला  उसमें रहे  तो,
          मुश्किलें होंगीं  फ़ना ।। प्रगति-पथ पर....
काटों में कैसे  मुस्कुराये,
गुल  गुलाबों का  सदा!!
कितना हसीं है गुल कवँल का!!
गोया हो  कीचड़  सना।। प्रगति-पथ पर....
         तो लो, सबक ले लो इन्हीं  से,
         ज़िंदगी के राज़ का।
         जैसे  खिले  ये गुल सभी,
          तुम  भी खिल जाओ यहां।।प्रगति-पथ पर....
खुद को समझो तो,
ख़ुदाई आप अपने आयेगी।
हर बलन्दी चूम  लेगी,
तेरे क़दमों  के  निशां।।प्रगति-पथ पर....
           जोखिमों  से  जूझना तो,।
            फ़र्ज़ है  इन्सान का ।
             गर  इन्हें ठुकराया तो,
             ठुकरा तुझे  देगा  जहां।।प्रगति-पथ पर....।।