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Friday, August 21, 2009

झलक ज़िन्दगी की

उजालों ने सबको बहुत कुछ दिया है,
अंधेरों में किस्मत चलो आज़माएँ।
सुकूँ ज़िन्दगी को अंधेरों ने जो दी,
चिरागों की दुनिया में वो मिल न पायें॥ अंधेरों में .......॥

हुई रात रोशन फलक पे सितारे
अंधेरों के साथी हैं यह प्यारे-प्यारे।
सूने गगन में है बज़्मे चरागाँ,
लगे जैसे दीपक दिवाली मनाएं॥ अंधेरों में ...............॥

ज़माने की खुशियों के हक़दार वो हैं,
शब्-ऐ-ग़म के साये तले जो चले हैं।
जिन्हें है अंधेरों से लड़ने की आदत,
उजाले उन्हें कब भला रास आयें॥ अंधेरों में...............॥

जीवन की बगिया में जो गुल खिले हैं,
काटों के साये तले वो पले हैं।
मगर खूबसूरत हैं गुल इस कदर कि,
हजारों उन्हें देखकर मात खाएं॥ अंधेरों में.................॥

दीवानी हो दुनिया भले रौशनी की,
उसे मिल सके ना झलक ज़िन्दगी की।
अंधेरों का जीवन से रिश्ता पुराना,
उजाले में उसको न हम ढूँढ़ पायें॥ अंधेरों में...............॥